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सिगरेट की तस्करी के कारण 3.34 लाख से ज्यादा रोजगार का हुआ है नुकसान : फिक्की कास्केड
June 15, 2020 • NELESH SHAIVE • राष्ट्रीय

                                               

सिगरेट तस्करी के खिलाफ कार्रवाई के लिए फिक्की कास्केड ने डीआरआई की सराहना की

नई दिल्ली : फिक्की कास्केड (अर्थव्यवस्था को बर्बाद कर रही तस्करी एवं जालसाजी जैसी गतिविधियों के खिलाफ कमेटी) ने 12 जून, 2020 को नवी मुंबई के जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट (जेएनपीटी) पर एक कंटेनर से 11.88 करोड़ रुपये के विदेशी ब्रांड के सिगरेट जब्त करने की कड़ी कार्रवाई के लिए राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) की तारीफ की है। लॉकडाउन के बाद से यह ऐसी सबसे बड़ी कार्रवाई में शुमार है। लॉकडाउन के दौरान प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा तस्करी कर लाई हुई विदेश सिगरेट की जब्ती के कई मामले सामने आए हैं। इससे यह भी संकेत मिलता है कि पिछले कुछ महीनों के दौरान सिगरेट की तस्करी बढ़ी है। यह स्थिति पूरे देश में है और इसीलिए सड़क के रास्ते, कार्गो में और यात्रियों के सामान में, हर जगह से इन्हें जब्त किया गया है।

डीआरआई के अधिकारियों को बधाई देते हुए फिक्की कास्केड के चेयरमैन श्री अनिल राजपूत ने कहा, “दुनियाभर में सिगरेट की तस्करी का एक बड़ा गिरोह है और भारत में यह संकट लगातार बढ़ रहा है। ऐसे समय में जबकि देश कोरोना वायरस के संकट से जूझ रहा है, ऐसे में इस तरह की तस्करी के मामले बढ़े हैं। मौजूदा चुनौतीपूर्ण हालात में इस दिशा में जुटे अधिकारियों की ओर से किया जा रहा प्रयास वास्तव में सराहनीय है।"

विकासशील देशों में तस्करी के कारण उनके घरेलू संसाधनों पर व्यापक प्रभाव पड़ता है। कर राजस्व कम होने के कारण वहां सरकारों द्वारा स्वास्थ्य, शिक्षा, इन्फ्रास्ट्रक्चर आदि पर होने वाला खर्च प्रभावित होता है। तस्करी से केवल राजकोष पर ही बुरा असर नहीं पड़ता है, बल्कि घरेलू उद्योग भी खतरे में पड़ता है, जिन पर कई लोगों की आजीविका निर्भर करती है। फिक्की कास्केड के एक हालिया अध्ययन के अनुमान के मुताबिक, 2017-18 में तस्करी के कारण भारत में 5 अलग-अलग सेक्टर में 16 लाख से ज्यादा रोजगार का नुकसान हुआ है। इसमें से केवल सिगरेट की तस्करी के कारण रोजगार के 3.34 लाख अवसर चले गए।

भारत सरकार ने इस समस्या से निपटने की दिशा में कई निर्णायक कदम उठाए हैं। कई कदमों के बाद भी अभी नीतिगत हस्तक्षेप और जागरूकता दोनों मोर्चे पर कई कदम उठाए जाने की जरूरत है। अवैध कारोबार पर लगाम के लिए सरकार को इस साल की शुरुआत में अपनी ओर से दी गई सिफारिशों में फिक्की कास्केड ने जब्ती के बाद नष्ट कर दिए जाने वाले नार्कोटिक्स और साइकोट्रोपिक पदार्थों की ही तरह तंबाकू के मामले में भी जब्त करने की कार्रवाई से जुड़े अधिकारियों के लिए एक रिवार्ड स्कीम शुरू करने का सुझाव दिया था। इसमें पुरस्कार की राशि का निर्धारण जब्ती की मात्रा और अपराध के प्रकार के हिसाब से तय की जा सकती है। इसके अलावा कस्टम्स द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले इन्फ्रास्ट्रक्चर एवं उपकरणों के आधुनिकीकरण का सुझाव भी दिया गया था, जिससे वस्तुओं की क्लियरेंस की एक फूलप्रुफ व्यवस्था तैयार हो सके और भारतीय कस्टम्स की क्षमता बढ़ेये सिफारिशें सितंबर, 2019 में हुए कास्केड के सालाना अंतरराष्ट्रीय आयोजन मास्केड (तस्करी और जाली कारोबार के खिलाफ आंदोलन) में हुई चर्चा के आधार पर की गई थीं। 

अवैध कारोबार दुनिया का सबसे तेजी से बढ़ रहा उद्योग है और विभिन्न अध्ययनों में सामने आए अनुमान के मुताबिक इसका आकार 650 मिलियन डॉलर से 3 ट्रिलियन डॉलर के बीच है और यह वैश्विक कारोबार के 10 प्रतिशत के बराबर है। बेराजगारी और बड़े वित्तीय नुकसान के अलावा अपराध को शह देकर और आतंकवाद की गतिविधियों की फंडिंग के जरिये यह अवैध कारोबार बड़े पैमाने पर अस्थिरता का कारण बनता हैफिक्की कास्केड पिछले कई वर्षों से इस संकट के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता लाने के लिए सरकार, उद्योग, प्रवर्तन अधिकारियों, कानून के जानकारों, उपभोक्ता संगठनों और उपभोक्ताओं के साथ मिलकर काम कर रहा है